दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों के व्यापारियों ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की मेगा रैली का कड़ा विरोध किया है. उनका कहना है कि दिवाली की खरीदारी के पीक सीजन के दौरान राजधानी के बीचों-बीच इतनी बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करने से थोक बाजार ठप हो जाएंगे, लोगों की रोजमर्रा की आजीविका प्रभावित होगी और व्यापारियों को 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ेगा.

एशिया के सबसे बड़े ऑटो पार्ट्स थोक बाजारों में से एक, कश्मीरी गेट स्थित ‘ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट एसोसिएशन’ (APMA) के प्रमुख पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वे लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस रैली का समय और स्थान व्यापार के लिए बेहद नुकसानदेह है.

रैली के लिए चुने गए स्थान और समय पर सवाल

रैली के लिए चुने गए स्थान और समय को खुदरा और थोक व्यापार के लिए विनाशकारी बताते हुए, APMA के सदस्यों ने प्रशासन से हस्तक्षेप करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि भारी जाम और बाहर से आने वाले खरीदारों के बीच मचे अफरा-तफरी के माहौल से पुरानी दिल्ली के 3 किलोमीटर के दायरे में थोक व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा, और हजारों दिहाड़ी मजदूरों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा.

APMA के अध्यक्ष विनय नारंग ने कहा कि दिवाली से ठीक पहले राजधानी के केंद्र में इस रैली का आयोजन करने से प्रमुख थोक व्यापारिक केंद्र पूरी तरह से ठप हो जाएंगे. नारंग ने कहा, ‘हम किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, और न ही हम लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों के खिलाफ हैं. लेकिन इसका समय और जगह पूरी तरह से गलत है. रामलीला मैदान एशिया के सबसे बड़े कमर्शियल ज़ोन (व्यापारिक क्षेत्र) के बीच में स्थित है. यहां से तीन किलोमीटर के दायरे में चांदनी चौक, सदर बाज़ार, दरियागंज, मोरी गेट और कश्मीरी गेट जैसे बड़े बाज़ार आते हैं’.

‘त्योहारों की खरीदारी पूरी तरह ठप हो जाएगी’

नारंग ने आगे कहा, ‘आयोजकों का दावा है कि यहां लगभग 10 लाख लोग इकट्ठा होंगे. इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए हज़ारों बसों और गाड़ियों की ज़रूरत पड़ेगी, जिससे भारी ट्रैफिक जाम लग जाएगा और त्योहारों की खरीदारी पूरी तरह ठप हो जाएगी. बाहर से आने वाले खरीदार अपना माल खरीदने के लिए नकद (कैश) साथ लाते हैं, लेकिन जब भी ऐसी रैलियां होती हैं, तो डर और अव्यवस्था के कारण बाहर के व्यापारी रैली से लगभग तीन दिन पहले और बाद तक दिल्ली आने से बचते हैं. हमने आयोजकों से अनुरोध किया था कि वे इस कार्यक्रम को दिल्ली के बाहरी इलाकों, जैसे बादली या बुराड़ी मैदान में शिफ्ट कर दें, या फिर इसकी तारीखें आगे बढ़ा दें, लेकिन हमारी बात नहीं मानी गई’.

प्रशासन और पुलिस से रैलियों को अनुमति न देने की अपील

APMA के उपाध्यक्ष रविंदर सिंह कोहली ने असंगठित क्षेत्र के कामगारों पर पड़ने वाले मानवीय और आर्थिक असर को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इस रैली की वजह से त्योहारों के मौसम में शहर के सबसे गरीब लोगों की कमाई का ज़रिया छिन जाएगा. कोहली ने कहा, ‘दिल्ली सरकार को अरबों रुपये का टैक्स देती है, फिर भी इसके मुख्य व्यापारिक केंद्रों को किसी किले में तब्दील कर दिया जाता है. इसका सबसे बुरा असर दिहाड़ी मजदूरों, कुलियों, सामान ढोने वालों और ठेला खींचने वालों पर पड़ता है, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए रोजाना 200-300 रुपये की कमाई पर निर्भर होते हैं. जब घबराहट और रास्तों पर पाबंदियों की वजह से बाहर से खरीदार आना बंद कर देते हैं, तो इन गरीब मजदूरों के घरों में चूल्हा तक नहीं जल पाता और उन्हें भूखे पेट ही सोना पड़ता है’. उन्होंने प्रशासन और पुलिस से अपील की कि वे ऐसी रैलियों को अनुमति न दें, जो दिल्ली के व्यापारिक केंद्र को पूरी तरह ठप कर देती हैं.

करीब 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान

APMA के महासचिव धर्मपाल रात्रा ने चेतावनी दी कि दिल्ली के व्यापारी समुदाय को होने वाला आर्थिक नुकसान हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. रात्रा ने कहा,’दिवाली से एक हफ्ते पहले देशभर के व्यापारी करोड़ों रुपये की खरीदारी करने के लिए दिल्ली आते हैं. ऐसे समय में शहर को पूरी तरह ठप कर देने से व्यापारियों को अनुमानित 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो सकता है. रैलियां शहर के बाहर खुली जगहों पर आयोजित की जानी चाहिए, जहां वे लोगों की आवाजाही में बाधा न डालें और मुख्य व्यावसायिक रास्तों को जाम न करें’.

व्यापारी प्रतिनिधियों ने प्रशासन और अधिकारियों से आग्रह किया कि विरोध-प्रदर्शन के लिए ऐसी जगहें तय की जाएं जो भीड़भाड़ वाले रास्तों और थोक बाजारों से दूर हों, ताकि त्योहार के समय व्यापार और लोगों की आजीविका सुरक्षित रहे.

राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से की खास अपील

इस बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को 1 नवंबर को होने वाली ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की मेगा रैली में शामिल होने वाले प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे दिवाली के त्योहार के मौके पर दिल्ली के व्यापारियों का समर्थन करें.

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन की रैली से व्यापारियों को कोई आर्थिक नुकसान नहीं होगा. कांग्रेस नेता ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह दिल्ली के व्यापारी समुदाय के बीच यह अफवाह फैला रही है कि इस रैली से उनका कारोबार बाधित होगा. दीवाली की शुभकामनाएं देते हुए, कांग्रेस नेता ने कहा कि रैली के दिन मार्च में शामिल होने वाले लाखों लोग सीधे व्यापारियों की दुकानों से सामान खरीदेंगे.

‘व्यापारियों की छोटी-छोटी दुकानों से सामान खरीदेंगे’

राहुल गांधी ने कहा, ‘नमस्कार, कल रामलीला मार्च के लिए लाखों लोग दिल्ली आ रहे हैं. अभी त्योहारों का मौसम है. दीवाली, छठ और भाई दूज का समय आ गया है. मैं चाहता हूं कि बाहर से दिल्ली आने वाले ये लाखों लोग यहां के व्यापारियों का समर्थन करें. विरोध करें, मार्च निकालें, रैलियां करें, और इसके साथ-साथ थोड़ी खरीदारी भी करें – इससे व्यापारियों को फायदा होगा. मुझे पता है कि इस रैली से व्यापारियों को कोई नुकसान नहीं होगा. बीजेपी डरी हुई है, इसलिए वह अफवाहें फैला रही है. लेकिन हम दोनों काम करेंगे. कल मार्च भी होगा, रैली भी होगी, और लाखों लोग हमारे व्यापारियों की छोटी-छोटी दुकानों से सामान भी खरीदेंगे. आप सभी को बहुत सारा प्यार. दीवाली की शुभकामनाएं. जय हिंद’.

गांधी का यह बयान तब आया है, जब ‘चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री’ और ‘फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन’ ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से अनुरोध किया था कि वे रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की मेगा रैली को टाल दें.