Yam Deepak Significance: धनतेरस पर घर को रोशन करने के लिए हम तरह-तरह के दीये जलाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक दीपक यमराज के नाम का भी जलाया जाता है?
मान्यता है कि धनतेरस की शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा में यम का दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सदस्यों को लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है. आखिर क्या है इस परंपरा के पीछे की कहानी और इसे जलाने का सही तरीका?
Yam Deepak Significance: क्यों जलाया जाता है यम का दीपक?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा है. इसे यम दीपदान भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन दीपदान करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों को लंबी उम्र का आशीर्वाद देते हैं. कहा जाता है कि इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार पर आने वाले संकट टलते हैं.
इस परंपरा के पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है. कथा के अनुसार, एक राजा के बेटे की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग था. जब उसकी पत्नी को यह बात पता चली, तो उसने पूरी रात घर के दरवाजे पर सोने-चांदी के आभूषण और दीपक रख दिए. साथ ही पति को जगाए रखने के लिए गाने और कहानियां सुनाती रही.
मान्यता है कि जब यमराज वहां पहुंचे, तो दीपकों की रोशनी और आभूषणों की चमक से उनकी नजर आगे नहीं बढ़ पाई. इस तरह राजकुमार की जान बच गई. तभी से यम दीपदान की परंपरा जुड़ी मानी जाती है.
किस दिशा में जलाना चाहिए यम का दीपक?
परंपरा के अनुसार, यम का दीपक घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दक्षिण दिशा की ओर जलाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है. इसलिए इस दिशा में दीपदान करना शुभ समझा जाता है.
क्या है यम का दीपक जलाने का सही तरीका?
- सबसे पहले मिट्टी का एक साफ दीपक लें.
- इसमें सरसों का तेल या तिल का तेल डालें.
- दीपक में रूई की बाती लगाएं और उसे जलाएं.
- दीपक को घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें.
- इसके बाद यमराज को याद करते हुए परिवार की सुख-शांति और लंबी उम्र की प्रार्थना करें.
यह भी पढ़ें: धनतेरस की शाम इन 5 जगहों पर जलाएं दीपक, घर में आएगी सुख-समृद्धि
The post धनतेरस की रात क्यों जलाया जाता है यम का दीपक? जानें इसके पीछे की मान्यता appeared first on Prabhat Khabar.

