अमेरिका में हुए 2026 के मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है. विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) में बहुमत हासिल कर लिया है. इस चुनाव में भारतीय मूल के लोगों ने भी शानदार जीत हासिल की है, जिसमें से एक नाम डेमोक्रेट नेता सबा हैदर का भी है, जिनका जन्म भारत में हुआ. सबा हैदर ने अमेरिका में इलिनोइस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (Illinois House of Representatives) के चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. वो इलिनोइस जनरल असेंबली के लिए चुनी जाने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बन गई हैं. आइये जानते हैं कौन हैं सबा हैदर.

सबा हैदर ने 3 नवंबर को हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में 84वें जिले से 70.9 प्रतिशत वोट हासिल किए. उन्हें 20,756 वोट मिले, जबकि उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी ब्रायन स्कोपा को 8,520 वोट (29.1 प्रतिशत) मिले.84वें जिले में विल, डुपेज, केन और केंडल काउंटियों के कुछ हिस्से आते हैं, जिनमें ऑरोरा, नेपरविले, ओस्वेगो, मोंटगोमरी और बोल्डर हिल शामिल हैं.

जीत के बाद सबा ने किया पोस्ट

इस शानदार जीत के बाद सबा हैदर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘हमने कर दिखाया! हमने पिछले 15 महीनों तक 84वें जिले के हर कोने में जाकर मतदाताओं से बात की. हमने जानने की कोशिश की कि उनके लिए क्या मायने रखता है, वो क्या बदलाव देखना चाहते हैं, और हम सब मिलकर कैसे एक मजबूत, समृद्ध और समावेशी समुदाय बना सकते हैं’.

सबा हैदर ने मतदाताओं, परिवार के सदस्यों, दोस्तों, अपनी कैंपेन टीम और स्वयंसेवकों को धन्यवाद दिया. उन्होंने अपने इस चुनाव अभियान को जमीनी स्तर पर लोगों की ताकत से चलने वाला आंदोलन बताया. उन्होंने कहा, ‘आखिरकार, यह चुनाव उन लोगों के बारे में था जो इस समुदाय को अपना घर मानते हैं. यह उस भविष्य को बनाने के बारे में था जिसके हम सभी हकदार हैं’.

सबा हैदर ने कहा कि उनकी जीत उन सभी लोगों के लिए है जो एक ऐसे इलिनोइस में विश्वास करते हैं, जो सभी के लिए निष्पक्ष, न्यायपूर्ण और सबका स्वागत करने वाला स्थान हो. उन्होंने कहा, ‘आगे और ऊपर की ओर!’ इलिनोइस की विधायिका में आने से पहले, सबा हैदर डुपेज काउंटी बोर्ड की सदस्य और कम्युनिटी एडवोकेट (समुदाय की पक्षधर) के रूप में काम कर चुकी हैं.

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से ताल्लुक

भारत में जन्मीं सबा हैदर का परिवार उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से है. वो लगभग 20 साल पहले अमेरिका आ गई थीं. सबा हैदर ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था, ‘तब से, मैंने अपना जीवन उस समुदाय की सेवा में समर्पित कर दिया है, जिसने मुझे और मेरे परिवार को इलिनोइस को अपना घर बनाने में मदद की थी’.

उन्होंने कहा कि वो समुदाय की चिंताओं को राज्य की राजधानी स्प्रिंगफील्ड तक ले जाकर और कामकाजी परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों को दूर करने के लिए चुने गए प्रतिनिधियों के साथ मिलकर काम करके, समुदाय की सेवा जारी रखना चाहती हैं. हैदर ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कहा, ‘ अच्छी तरह जानती हूंकि हमारे कामकाजी परिवार किन संघर्षों से गुजर रहे हैं. मैं हमारे चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ मिलकर उन समस्याओं का समाधान खोजना चाहती हूं, जिनका हम सभी सामना कर रहे हैं’.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पढ़ाई

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) की पूर्व छात्रा, सबा हैदर ने इसी संस्थान से वाइल्ड लाइफ साइंस (वन्यजीव विज्ञान) में MSc की डिग्री हासिल की है. AMU ने उनकी जीत पर उन्हें बधाई दी और इसे विश्वविद्यालय समुदाय के लिए गर्व का क्षण बताया. मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में वाइल्ड लाइफ साइंस की पढ़ाई करने से लेकर अमेरिका में योग सिखाने और फिर चुनावी राजनीति में कदम रखने तक, 42 वर्षीय सबा हैदर ने अपने शानदार सफर में एक और उपलब्धि जोड़ ली है.

गाजियाबाद के पैतृक घर में जीत का जश्न

सबा हैदर, जिनका परिवार मूल रूप से बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद कस्बे से है. गाजियाबाद में उनके पैतृक घर पर उनकी जीत का जश्न मनाया गया, और बुलंदशहर में रहने वाले उनके रिश्तेदार भी इस खुशी में शामिल हुए. उनके पिता, सैयद अली हैदर, जो एक रिटायर्ड इंजीनियर हैं, उन्होंने बताया कि नतीजे आने के बाद से ही उन्हें बधाई देने वालों के फोन आ रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘यह सिर्फ हमारे परिवार की जीत नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है’.

बचपन से थी जन-कार्यों और राजनीति में रुचि

उनकी मां, चांदनी ने बताया कि सबा की बचपन से ही जन-कार्यों और राजनीति में रुचि थी. उन्होंने कहा, ‘वो हमेशा वाद-विवाद और भाषण प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती थीं. मुझे लगता है कि उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने ही राजनीति और जनसेवा के प्रति उनके जुनून की नींव रखी’.

गाजियाबाद में शुरुआती पढ़ाई

सबा ने गाजियाबाद के होली चाइल्ड स्कूल से पढ़ाई की और उसके बाद राम चमेली चड्ढा विश्वास गर्ल्स कॉलेज से BSc की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने AMU से वाइल्डलाइफ साइंस में गोल्ड मेडल हासिल किया. 2006 में उन्होंने बुलंदशहर के कंप्यूटर साइंस इंजीनियर अली काज़मी से शादी की और 2007 में उनके साथ अमेरिका चली गईं.

अमेरिका में सबा का सफर

शिकागो क्षेत्र में बसे इस दंपति के दो बच्चे हैं, अज़ीम (16) और आइज़ा (12). सबा ने प्रमाणित योग शिक्षिका बनकर कॉलेज के छात्रों से लेकर कॉर्पोरेट जगत के पेशेवरों तक, विभिन्न प्रकार के ग्राहकों को प्रशिक्षण दिया. स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में उनके कार्यों ने उन्हें स्थानीय समुदाय में मजबूत संबंध बनाने में मदद की.

चांदनी ने कहा, ‘पिछले कुछ सालों में, सबा ने स्वास्थ्य और सामाजिक पहलों के माध्यम से अपने समुदाय के लोगों के साथ मजबूत संबंध बनाए हैं. उनके पति ने भी उनका पूरा समर्थन किया है, उन्हें सार्वजनिक कार्यों में भाग लेने और अपने राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है. हम हमेशा उनकी महत्वाकांक्षाओं के साथ खड़े रहे हैं’.

हालांकि, उनका राजनीतिक सफर असफलताओं से रहित नहीं था. उन्होंने पहली बार 2022 में डुपेज काउंटी बोर्ड के चुनाव में भाग लिया, लेकिन लगभग 1,000 वोटों से हार गईं. एक और प्रयास करने के दृढ़ संकल्प के साथ, वो 2024 में चुनावी मैदान में लौटीं और रिपब्लिकन पार्टी की मौजूदा सदस्य पैटी गुस्टिन को 8,521 वोटों के बड़े अंतर से हराकर डुपेज काउंटी बोर्ड में अपनी सीट सुरक्षित कर ली.

इस बोर्ड में छह जिलों के निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल हैं, जिनका कार्यकाल लॉटरी द्वारा निर्धारित किया जाता है और दो से चार साल तक भिन्न होता है. तब से, हैदर ने काउंटी बोर्ड की पर्यावरण और रणनीतिक योजना समितियों की अध्यक्षता की है और सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास से संबंधित मुद्दों पर काम किया है. राज्य विधानमंडल के लिए उनके अभियान का मुख्य फोकस किफायती स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बढ़ती महंगाई को कम करना था.