प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NVS-03 को ले जाने वाले GSLV-F18 के सफल प्रक्षेपण पर इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) के साइंटिस्ट और इंजीनियर को बधाई दी. पीएम मोदी ने कहा कि यह मिशन ‘नाविक’ (NavIC) को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत का अपना स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है.
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने कहा ‘NVS-03 को ले जाने वाले GSLV-F18 के सफल प्रक्षेपण पर ISRO के हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई. पीएम ने आगे कहा ‘यह मिशन हमारे स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम, ‘नाविक’ (NavIC) को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. बेहतर क्षमताओं से लैस, NVS-03 महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भर बनने के हमारे प्रयासों को आगे बढ़ाएगा और ऐसी नेविगेशन सेवाओं में मदद करेगा जिनसे हमारे लोगों को लाभ मिलेगा. हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का समर्पण और उनकी सूझबूझ लगातार हमारे देश को गौरवान्वित कर रही है’.
Congratulations to our scientists and engineers at ISRO on the successful launch of GSLV-F18 carrying NVS-03.
This mission marks an important step in strengthening NavIC, our indigenous satellite navigation system. Equipped with enhanced capabilities, NVS-03 will further our pursuit of self-reliance in critical technologies and support navigation services that benefit our people.
The dedication and ingenuity of our space scientists continue to make our nation proud.
@isro
— Narendra Modi (@narendramodi) October 31, 2026
GSLV-F18 रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च
इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) ने शुक्रवार (30 अक्टूबर) को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर से नेक्स्ट-जेनरेशन नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 को ले जाने वाले अपने GSLV-F18 रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया. 50 मीटर ऊंचे लॉन्च व्हीकल ने 24 घंटे के काउंटडाउन के बाद, रात 11:51 बजे स्पेसपोर्ट के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरी.
तय ‘जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट’ में स्थापित
अपने ताजा अपडेट में, ISRO ने मिशन के सफल होने की पुष्टि की और बताया कि रॉकेट ने सैटेलाइट को उसकी तय ‘जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट’ (GTO) में स्थापित कर दिया है. 420 टन वजन वाले इस तीन-चरण (थ्री-स्टेज) रॉकेट ने 2,232 किलोग्राम वजनी NVS-03 सैटेलाइट को अपने साथ ले जाया. उम्मीद है कि यह मिशन भारत की स्वतंत्र सैटेलाइट नेविगेशन क्षमताओं को और मजबूत करेगा.
NVS-03, ISRO की अगली पीढ़ी की नेविगेशन सैटेलाइट श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है. इसे ‘इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम’ (IRNSS) – जिसे आमतौर पर ‘NavIC’ के नाम से जाना जाता है – के तहत सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
स्वदेशी एटॉमिक घड़ी भी लगी
ISRO के अनुसार, इस उपग्रह में बाहर से ली गई एटॉमिक घड़ियों के साथ-साथ स्वदेशी एटॉमिक घड़ी भी लगी है. इसके अलावा, इसमें पहले से मौजूद L5 और S-बैंड सिग्नलों के साथ-साथ L1 फ्रीक्वेंसी सिग्नल को भी शामिल किया गया है. ISRO ने बताया कि उपग्रह में बाहर से ली गई एटॉमिक घड़ियों के साथ-साथ स्वदेशी एटॉमिक घड़िया भी लगी हैं.
L5/S सिग्नलों के अलावा L1 सिग्नल भी शामिल
इसमें मौजूदा L5/S सिग्नलों के अलावा L1 सिग्नल भी शामिल है, जो भारतीय भू-भाग और भारत की भौगोलिक सीमाओं के चारों ओर 1500 km के दायरे तक कवरेज प्रदान करता है. L1 सिग्नल के आने से स्मार्टफोन और वियरेबल टेक्नोलॉजी जैसे मॉडर्न सिविलियन नेविगेशन डिवाइस के साथ कम्पैटिबिलिटी बेहतर होने की उम्मीद है.

