कर्नाटक हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की जांच और उसके अधिकारों को लेकर अहम टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि ED कोई ‘सुपर कॉप’ नहीं है, जो अपनी जानकारी में आने वाले हर मामले की जांच शुरू कर दे. प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत ED की जांच तभी आगे बढ़ सकती है, जब उससे जुड़ा मूल अपराध यानी ‘प्रेडिकेट ऑफेंस’ मौजूद हो. अगर मूल अपराध ही खत्म हो जाता है, तो मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही भी आगे नहीं चल सकती.

अदालत ने यह भी साफ किया कि अगर ED किसी अनुसूचित अपराध से जुड़ी जानकारी स्थानीय पुलिस या संबंधित एजेंसी को देती है और वहां से कोई कार्रवाई नहीं होती, तो ED खुद मजिस्ट्रेट कोर्ट में निजी शिकायत दर्ज कर जांच शुरू नहीं करवा सकती. PMLA में एजेंसी को ऐसा अधिकार नहीं दिया गया है. जस्टिस एम.आई. अरुण ने कांग्रेस नेता के.वाई. नंजे गौड़ा और अन्य के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही रद्द करते हुए यह टिप्पणी की. अदालत ने ED को जब्त की गई वस्तुएं भी याचिकाकर्ता को लौटाने का निर्देश दिया.

ED की जांच के लिए मूल अपराध जरूरी

हाई कोर्ट ने कहा कि PMLA के तहत ED की शक्तियां मूल नहीं, बल्कि दूसरे कानूनों के तहत दर्ज अपराधों पर आधारित हैं. यानी एजेंसी केवल मनी लॉन्ड्रिंग के संदेह के आधार पर अपने स्तर पर कोई नई जांच शुरू नहीं कर सकती. इसके लिए जरूरी है कि पहले कोई अनुसूचित अपराध दर्ज हो.

अदालत के मुताबिक, PMLA की धारा 66(2) के तहत अगर ED को अपनी जांच में किसी दूसरे अनुसूचित अपराध से जुड़ी जानकारी मिलती है, तो उसे संबंधित पुलिस या जांच एजेंसी के साथ साझा करना चाहिए. लेकिन कानून ED को उस अपराध में खुद निजी शिकायत दर्ज करने का अधिकार नहीं देता. कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला कांग्रेस नेता के.वाई. नंजे गौड़ा से जुड़ा है. आरोप है कि जब वह कर्नाटक के कोलार जिले के मालुर में भूमि आवंटन समिति के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने समिति के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर करीब 38 लोगों को 80 एकड़ जमीन आवंटित करने की सिफारिश की थी. उन पर अपने पद का दुरुपयोग कर गैरकानूनी तरीके से जमीन आवंटित कराने का आरोप लगा.

सामाजिक कार्यकर्ता के.सी. राजन्ना ने 2022 में बेंगलुरु की अदालत में गौड़ा और अन्य लोगों के खिलाफ निजी शिकायत दर्ज कराई थी. इसके आधार पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश समेत IPC की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज हुआ. ED ने इसे मूल अपराध मानते हुए 2023 में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की.

जांच के दौरान ED को कोलार और चिक्काबल्लापुर मिल्क यूनियन लिमिटेड में कर्मचारियों की भर्ती में कथित गड़बड़ी के सबूत मिले. एजेंसी ने इस नौकरी घोटाले से जुड़ी जानकारी PMLA की धारा 66(2) के तहत स्थानीय पुलिस के साथ साझा की. हालांकि, पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की.

ED ने खुद दर्ज की निजी शिकायत

इस बीच, जमीन आवंटन से जुड़ा मूल मामला मुकदमा आगे नहीं बढ़ने के कारण खारिज हो गया. इसके बाद भी ED ने नौकरी घोटाले की जांच आगे बढ़ाने के लिए 2024 में मजिस्ट्रेट कोर्ट में निजी शिकायत दर्ज की. एजेंसी ने मांग की कि मामले को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच के लिए लोकायुक्त पुलिस को भेजा जाए.

गौड़ा की ओर से दलील दी गई कि जब मूल अपराध ही खत्म हो चुका है, तो ED मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी नहीं रख सकती. साथ ही, एजेंसी को सिर्फ संबंधित जांच एजेंसी के साथ जानकारी साझा करने का अधिकार है, खुद निजी शिकायत दर्ज करने का नहीं. वहीं, ED ने कहा कि मूल मामला अगर तकनीकी कारणों से बंद हुआ है, तो भी उसे मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करने का अधिकार है. हालांकि, हाई कोर्ट ने ED की इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कार्यवाही रद्द कर दी.