भारतीय नौसेना का जहाज INS सुदर्शिनी 10 महीने का लंबा समुद्री सफर पूरा करके 2 नवंबर को कोच्चि लौट आया. इस दौरान जहाज ने 22 हजार से ज्यादा नॉटिकल मील की दूरी तय की. कोच्चि पहुंचने पर जहाज का वाटर कैनन सैल्यूट और नौसेना के बैंड के साथ शानदार स्वागत किया गया. जहाज पर तैनात अधिकारियों और जवानों के परिवार भी अपने लोगों का स्वागत करने के लिए मौजूद थे.

दक्षिणी नौसेना कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने स्वागत समारोह की अध्यक्षता की. उन्होंने इस मुश्किल समुद्री अभियान को सफल बनाने के लिए जहाज के पूरे क्रू की तारीफ की. उन्होंने कहा कि जवानों की मेहनत, हौसले और काम के प्रति समर्पण ने भारतीय नौसेना का नाम रोशन किया है.

11 देशों के 17 बंदरगाहों पर पहुंचा INS सुदर्शिनी

INS सुदर्शिनी को 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से इस अभियान के लिए रवाना किया गया था. 10 महीने के इस सफर में जहाज एशिया, यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के 11 देशों के 17 बंदरगाहों पर पहुंचा. इस दौरान दो बार अटलांटिक महासागर भी पार किया गया.

18 दिनों तक सिर्फ पाल के सहारे समुद्र में सफर

इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि अटलांटिक महासागर में 2,200 नॉटिकल मील का सफर सिर्फ पाल के सहारे 18 दिनों में पूरा करना रहा. इस दौरान खराब मौसम और समुद्र की मुश्किल परिस्थितियों के बीच नौसैनिकों ने अपने हुनर, हिम्मत और टीमवर्क का शानदार प्रदर्शन किया.

कई देशों की नौसेनाओं के साथ बढ़ाया सहयोग

इस अभियान के दौरान INS सुदर्शिनी ने फ्रांस में समुद्री विरासत से जुड़े कार्यक्रम और अमेरिका में SAIL 250 और इंटरनेशनल नेवल रिव्यू में हिस्सा लिया. इसके अलावा मोरक्को, पुर्तगाल, इटली, मिस्र और स्पेन की नौसेनाओं के साथ प्रशिक्षण और बातचीत भी हुई. इससे भारत के दूसरे देशों के साथ समुद्री रिश्ते और मजबूत हुए.

युवा नौसैनिक अधिकारियों को मिला खास प्रशिक्षण

इस अभियान का मकसद युवा नौसैनिक अधिकारियों को समुद्र में जहाज चलाने का व्यावहारिक अनुभव देना भी था. इस दौरान उन्हें समुद्री रास्तों की जानकारी, जहाज की निगरानी, पाल संभालने और मौसम को समझने जैसी जरूरी चीजों का प्रशिक्षण मिला.

INS सुदर्शिनी ने विदेशों में भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की और भारत की समुद्री विरासत और संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाया. लोकायन-26 की सफलता भारतीय नौसेना के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. यह अभियान दुनिया में भारत की समुद्री ताकत, नौसेना के प्रशिक्षण और दूसरे देशों के साथ सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित हुआ है.