केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपने इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. देश के अलग-अलग संवेदनशील इलाकों में तैनाती के बावजूद फोर्स ने लगातार 12 महीने ऐसे पूरे किए हैं, जिनमें किसी जवान की ऑपरेशनल मौत नहीं हुई. CRPF के इतिहास में करीब 47 साल बाद ऐसा रिकॉर्ड बना है. CRPF के महानिदेशक (DG) जीपी सिंह ने सोमवार को इसकी जानकारी दी.
CRPF के DG ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉम ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, ‘CRPF के इतिहास में एक अहम पड़ाव- लगातार एक साल ऐसे बीते हैं जब फोर्स में किसी ऑपरेशनल मौत की खबर नहीं आई, फोर्स में आखिरी ऑपरेशनल मौत 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी. ऐसा 47 साल बाद हुआ है, पिछली बार ऐसा समय जनवरी 1979 में खत्म हुआ था.’
1947 से अब तक 2268 जवानों की ऑपरेशनल मौत
जीपी सिंह ने अपने पोस्ट में बताया कि साल 1947 से अब तक CRPF के 2,268 जवान ऑपरेशन में मारे गए हैं, यानी हर साल औसतन 28 से ज़्यादा जवान मारे गए. इसमें एक साल में सबसे ज्यादा 2010 में 143 जवान मारे गए थे, जिसका मुख्य कारण माओवादी हमला था जिसमें 75 जवान मारे गए थे. वहीं, पिछली बार फरवरी 1977 और जनवरी 1979 के बीच 24 महीने तक कोई ऑपरेशनल मौत नहीं हुई थी.
‘मेडिकल केयर इसमें अहम भूमिका निभा सकती है’
DG जीपी सिंह ने कहा, ‘पिछले साल करेगुट्टालू हिल्स में ऑपरेशन ब्लैक फ़ॉरेस्ट के दौरान एक भी कैज़ुअल्टी नहीं हुई, जबकि 21 नक्सली मारे गए थे.’ एक पोस्ट-एनालिसिस में पाया गया कि तीन-चौथाई से चार-पांचवें हिस्से की मौतें चोट लगने के कुछ दिनों बाद होती हैं. समय पर मेडिकल केयर से ऐसी मौतों को रोका जा सकता है, इसमें एयर एम्बुलेंस से काफी मदद हो रही है.
DG ने इस कामयाबी का क्रेडिट किसे दिया?
CRPF के DG ने मॉडर्न हार्डवेयर, बेहतर ट्रेनिंग, स्ट्रेटेजिक प्लानिंग और घायल जवानों को तेज़ी से मेडिकल सुविधाओं तक पहुंचाने को इस कामयाबी का क्रेडिट दिया. उन्होंने कहा, ‘यह खास तौर पर इसलिए अहम है क्योंकि यह तब हुआ है जब हम सभी बड़े ऑपरेशनल थिएटर में तैनात हैं और अहम नतीजे हासिल कर रहे हैं. हम देश को उसके सभी नागरिकों के लिए शांतिपूर्ण और सुरक्षित रखने के लिए कमिटेड हैं.’

