एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की वित्त वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट ने राजनीतिक दलों की फंडिंग और पारदर्शिता से जुड़े कई सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, देश में रजिस्टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) में से करीब 65% की वित्तीय रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है. यानी इन दलों को कितना चंदा मिलता है, उनकी आय कितनी है और वे पैसा कहां खर्च करते हैं, इसका हिसाब भी सार्वजनिक नहीं है. दूसरी तरफ, कुछ ऐसे दलों ने भी करोड़ों रुपये का चंदा घोषित किया है, जिन्हें चुनाव में कोई सीट नहीं मिली.
ADR के मुताबिक, सितंबर 2026 तक चुनाव आयोग की सूची में करीब 2,074 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल थे. इनमें से 1,330 पार्टियों की वित्त वर्ष 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट और चंदे से जुड़ी रिपोर्ट राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं थी. यानी करीब 65% पार्टियों की वित्तीय जानकारी आम लोगों की पहुंच से बाहर है. केवल 734 पार्टियों ने इन दोनों में से कम से कम एक रिपोर्ट जमा की थी. इनमें भी सिर्फ 461 पार्टियों की ऑडिट और चंदे, दोनों की रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थी. बाकी 273 पार्टियों की दोनों में से कोई एक रिपोर्ट ही मिल पाई.

ऐसी पार्टियां यूपी में सबसे ज्यादा
राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 530 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं. इनमें से 304 की वित्तीय रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी. ADR के एनालिसिस में उत्तराखंड, पुडुचेरी, सिक्किम, अंडमान-निकोबार, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली, मेघालय, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश के लिए भी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई.
जीरो विधायक वाली पार्टियों को मिला करोड़ों का चंदा
ADR के रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में सबसे ज्यादा चंदा घोषित करने वाली 15 पार्टियों ने 20 हजार रुपये से अधिक के योगदान के रूप में कुल 1,064 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बताई. इन 15 दलों की कुल घोषित आय 973.93 करोड़ रुपये थी.
इनमें गुजरात की न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी ने सबसे ज्यादा 270.99 करोड़ रुपये का चंदा घोषित किया. इसकी कुल आय करीब 291.64 करोड़ रुपये बताई गई. इसके बाद स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी ने 228.81 करोड़ रुपये और राजस्थान की भारतीय गरीब विकास कल्याण पार्टी ने 170.04 करोड़ रुपये का चंदा घोषित किया.
इन आंकड़ों के साथ चुनावी प्रदर्शन को देखने पर तस्वीर अलग नजर आती है. न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दो सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे कुल 1,426 वोट मिले. स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी चार सीटों पर चुनाव लड़ी और उसे 12,741 वोट मिले. वहीं, भारतीय गरीब विकास कल्याण पार्टी ने लोकसभा चुनाव में एक सीट पर उम्मीदवार उतारा था, जिसे 1,347 वोट मिले.
जन सुराज को मिला 99.40 करोड़ का चंदा
बिहार में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के आंकड़े भी चर्चा में हैं. ADR के मुताबिक, पार्टी ने वित्त वर्ष 2024-25 में 101.32 करोड़ रुपये की कुल आय घोषित की. इसमें 99.40 करोड़ रुपये चंदे से मिले थे. इस दौरान पार्टी का कुल खर्च 9.20 करोड़ रुपये रहा. जन सुराज को चंदा देने वालों में सबसे बड़ा नाम वेधास वेंचर्स का है. इस कंपनी ने 85 अलग-अलग लेन-देन के जरिए पार्टी को 85 करोड़ रुपये दिए. वहीं, पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी 10 बार में कुल 10 करोड़ रुपये का व्यक्तिगत योगदान दिया.
रिपोर्ट के मुताबिक, जन सुराज के शीर्ष 10 दानदाताओं ने कुल 97.72 करोड़ रुपये दिए. यह रकम 104 लेन-देन के जरिए पार्टी को मिली. ADR के एनालिसिस में शामिल 10 पार्टियों के शीर्ष दानदाताओं के कुल योगदान में जन सुराज का हिस्सा करीब 80.77% था. जन सुराज ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई. हालांकि, इसके बाद जुलाई 2026 में हुए उपचुनाव में पार्टी ने एक सीट जीत ली.

रिपोर्ट में वित्तीय आंकड़ों के बीच गड़बड़ियां भी मिलीं
ADR ने अपनी रिपोर्ट में सिर्फ दस्तावेजों की कमी नहीं बताई, बल्कि कुछ पार्टियों के वित्तीय आंकड़ों में अंतर भी दर्ज किया. रिपोर्ट के अनुसार, 14 पार्टियों ने 20 हजार रुपये से अधिक के चंदे की जो रकम बताई, वह उनकी ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज कुल चंदे से ज्यादा थी. वहीं, तीन पार्टियों ने ऑडिट रिपोर्ट में कुल चंदा जीरो बताया, लेकिन योगदान रिपोर्ट में 20 हजार रुपये से अधिक के चंदे का ब्योरा दिया. इससे पार्टियों की ओर से जमा किए गए दस्तावेजों की जांच और जानकारी की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं.
ADR ने क्या सुझाव दिए?
ADR ने चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों से राजनीतिक दलों की वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करने की व्यवस्था मजबूत करने की सिफारिश की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन दलों की ऑडिट और चंदे की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है, उनकी जानकारी नियमित रूप से वेबसाइट पर अपडेट की जानी चाहिए. जिन पार्टियों ने लंबे समय से चुनाव नहीं लड़ा या समय पर जरूरी रिपोर्ट जमा नहीं की, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई पर भी विचार होना चाहिए. करोड़ों रुपये का चंदा पाने वाले दलों के साथ-साथ 1,330 पार्टियों का हिसाब भी सार्वजनिक होना जरूरी है.
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