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इंडियन नेवी को मिलेंगे 8 नए कॉर्वेट युद्धपोत:कैबिनेट ने ₹40 हजार करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी; 70% से ज्यादा सामान भारत में बनेगा
पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने इंडियन नेवी के लिए 8 नए कॉर्वेट युद्धपोत बनाने की मंजूरी दी है। इस परियोजना पर ₹40 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च किए जाएंगे। इन युद्धपोतों में 70% से ज्यादा सामान भारत में बनाया जाएगा। इससे देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले युद्धपोत का निर्माण एक साल के भीतर शुरू होने की उम्मीद है। इसे 2030 तक नौसेना को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। 8 युद्धपोतों को सरकारी क्षेत्र की दो कंपनियां बनाएंगी इन 8 युद्धपोतों को सरकारी क्षेत्र की दो कंपनियां बनाएंगी। इनमें कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) शामिल हैं। दोनों कंपनियों के साथ अगले कुछ दिनों में निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट होने की उम्मीद है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, हाल के समय में सरकार के उच्च स्तर पर मंजूरी पाने वाली यह पहली बड़ी रक्षा परियोजना है। इससे इंडियन नेवी की ताकत बढ़ेगी और देश में युद्धपोत बनाने को बढ़ावा मिलेगा। अगले 4-5 साल में युद्धपोतों की डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद इन युद्धपोतों में 70% से ज्यादा सामान भारत में बनाया जाएगा। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान और देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। सभी 8 युद्धपोत भारत में ही बनाए जाएंगे। इससे सरकार के SAGAR विजन को भी मजबूती मिलेगी। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, अगले 4 से 5 साल में इन युद्धपोतों की डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद है। यह परियोजना ऐसे समय में मंजूर हुई है, जब इंडियन नेवी हिंद महासागर में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अपने बेड़े को आधुनिक बना रही है। नेवी को मिले 3 स्वदेशी युद्धपोत इसी साल 21 जून को तीन स्वदेशी युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल किए गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इनका कमीशनिंग समारोह किया था। INS संशोधक एक बार में लगातार 12 हजार किलोमीटर तक जा सकता है। INS दूनागिरी 8 ब्रह्मोस मिसाइल्स से लैस है। वहीं, INS अग्रय भारतीय तटरेखा के पास मौजूद दुश्मन पनडुब्बियों को नष्ट कर सकता है। जानिए तीनों वॉरशिप की खासियत… INS दूनागिरी- ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों से लैस INS दूनागिरी प्रोजेक्ट-17A का 5वां स्टील्थ फ्रिगेट वॉरशिप है। इसे नेवी के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। प्रोडक्शन कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने किया है। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर (डिजाइनेट) कैप्टन दिव्य आलोक ने कहा कि दूनागिरी ईस्ट नेवल कमान और ईस्टर्न फ्लीट का हिस्सा बनेगा। INS संशोधक- समुद्र का नक्शा और सर्वे करेगा INS संशोधक सर्वे वेसल (लार्ज) सीरीज का चौथा जहाज है। इसका काम युद्ध लड़ना नहीं, बल्कि समुद्र का सर्वे करना है। इसे तट और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वे, समुद्री डेटा कलेक्शन और डिफेंस-सिविल यूज के लिए बनाया गया है। बंदरगाहों और समंदर के रास्तों का सर्वे करना भी इसके मुख्य काम में शामिल है। INS अग्रय- दुश्मन की सबमरीन खोजकर नष्ट करेगा INS अग्रय अर्नाला क्लास का चौथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट यानी उथले पानी का वॉरशिप है। इसे हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और एडवांस्ड सोनार सिस्टम से लैस किया गया है। जिससे यह तटों पर तैनात दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें निशाना बना सकता है। --------------- यह खबर भी पढ़ें… एयरफोर्स चीफ बोले-कोई लक्ष्य हमारी पहुंच से बाहर नहीं:ऑपरेशन सिंदूर में साबित किया; दुश्मन की रणनीति के हिसाब से खुद को ढालना जरूरी वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किलोमीटर चौड़े और 200 किलोमीटर क्षेत्र में सटीक हमले किए। पूरी खबर पढ़ें…
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