क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर लोगों से करीब 112.91 करोड़ रुपये जुटाने वाली हैशपे (Hashpe) कंपनी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी के चेन्नई जोनल ऑफिस-II ने इस मामले में पीएमएलए की विशेष अदालत, पुडुचेरी में आरोपपत्र दाखिल किया है. साथ ही 14.16 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं. अटैच की गई संपत्तियों में तमिलनाडु, हरियाणा और नई दिल्ली में स्थित संपत्तियां, एक BMW कार और बैंक खातों में जमा रकम शामिल है.
ईडी के मुताबिक, हैशपे कंपनी के प्रमोटरों ने क्रिप्टोकरेंसी आधारित निवेश योजना के नाम पर लोगों को मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया था. निवेशकों से रोजाना एक फीसदी रिटर्न, निवेश की रकम तीन गुना करने, दूसरे लोगों को जोड़ने पर कमीशन और लग्जरी कारों व विदेश यात्राओं जैसे इनाम देने का वादा किया गया था.
मल्टी लेवल मार्केटिंग के जरिए फैलाया नेटवर्क
ईडी की जांच में सामने आया कि आरोपी hashpe.io वेबसाइट और मल्टी लेवल मार्केटिंग नेटवर्क के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाते थे. इस पूरे नेटवर्क को इमरान बाशा, हितेश कुमार और सैयद उस्मान उर्फ बाबू चला रहे थे. इनके साथ धामोदरन और अन्य सहयोगी भी शामिल थे.
लोगों से नकद, बैंक ट्रांसफर और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए निवेश कराया गया. निवेशकों को TCX और Hashpe नाम के कथित क्रिप्टो कॉइन दिखाए जाते थे और वेबसाइट पर मुनाफा बढ़ता हुआ नजर आता था, जबकि इसके पीछे कोई वास्तविक ट्रेडिंग गतिविधि नहीं थी.
नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को करते थे भुगतान
जांच में पता चला कि नए निवेशकों से आने वाले पैसों का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने और नेटवर्क से जुड़े ‘लीडर्स’ को कमीशन देने में किया जाता था. इससे निवेशकों को शुरुआत में मुनाफा मिलने का भरोसा होता था और वे दूसरे लोगों को भी इस योजना से जोड़ते थे. बाद में कंपनी ने पैसे निकालने पर रोक लगा दी और अपना ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी बंद कर दिया. इससे बड़ी संख्या में निवेशकों को नुकसान हुआ. ईडी की जांच के अनुसार, इस योजना के जरिए करीब 112.91 करोड़ रुपये जुटाए गए थे. इसमें से कुछ रकम निवेशकों को वापस की गई, जबकि बाकी रकम M/s HIFY Circle और अन्य संबंधित लोगों व कंपनियों के बैंक खातों के अलावा क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट के जरिए इधर-उधर भेजी गई.
जांच में यह भी सामने आया कि निवेशकों के पैसों का इस्तेमाल निजी खर्चों, कर्ज चुकाने, भारी कमीशन देने, प्रचार कार्यक्रमों और संपत्तियां खरीदने में किया गया. ईडी ने इस मामले में करीब 49.54 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय की पहचान की है.
चार आरोपी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
ईडी ने इससे पहले 1 सितंबर 2026 को हैशपे कंपनी, उसके प्रमोटरों और सहयोगियों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी. इसके बाद इमरान बाशा, हितेश कुमार, सैयद उस्मान उर्फ बाबू और धामोदरन को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था. फिलहाल, चारों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं.

