केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी को मतदाता सूची (SIR) और ईवीएम पर संसद में बहस की चुनौती दी है. उन्होंने राहुल के पीएम मोदी को दिए बहस की चुनौती पर पलटवार करते हुए कहा कि आप प्रधानमंत्री से बहस के लिए जगह चुनने को कहते हैं. जगह तो पहले से है: संसद, जहां आप नेता प्रतिपक्ष होते हैं. साथ ही उन्होंंने ‘मॉक पार्लियामेंट’ को संसद का मजाक करार दिया.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरीए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि सरकार SIR और EVM पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है. साथ ही पूछा- आप पार्लियामेंट में बहस के लिए वही जोश क्यों नहीं दिखाते जो सोशल मीडिया पर चैलेंज देते समय दिखाते हैं?

‘आपने बार-बार कार्यवाही में रुकावट डाली है’

निर्मला सीतारमण ने कहा किजवाब मांगने का मतलब है कि उन्हें सुनना भी जरूरी है. कई बार ऐसा हुआ है जब आप और आपकी पार्टी पार्लियामेंट से वॉकआउट कर गए हैं, जबकि सरकार आपके आरोपों का जवाब दे रही थी. आप बहस के लिए इतने उत्सुक होने का दावा कैसे कर सकते हैं जब आप दूसरी तरफ की बात सुनने के लिए भी नहीं रुकते? यह वॉकआउट पर ही खत्म नहीं होता.

उन्होंने आगे कहा कि आपने और INDI अलायंस ने बार-बार कार्यवाही में रुकावट डाली है, जिससे पूरी सिटिंग धुल गई. अगर आप बहस के इतने ही इच्छुक हैं, तो पहले सदन को चलने क्यों नहीं देते? और फिर वह मॉक पार्लियामेंट, सच कहूं तो, यह पार्लियामेंट का मज़ाक था. आपको उस काम के लिए समय और जोश मिला. यकीनन, असली पार्लियामेंट कम से कम इतनी तो हकदार है ही.

‘LoP से जिम्मेदारी दिखाने की उम्मीद की जाती है’

वित्त मंत्री यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘आप डेमोक्रेसी और संविधान की रक्षा के बारे में बहुत बोलते हैं. लेकिन यह सम्मान इस बात में भी दिखना चाहिए कि आप उनके बनाए इंस्टीट्यूशन के साथ कैसा व्यवहार करते हैं. जहां तक उन मुद्दों की बात है जिन्हें आप बिना सोचे-समझे उठाते हैं, उनके सपोर्ट में खास आरोप और सबूत लाएं. सिर्फ आरोपों की लंबी लिस्ट बना देने से आपका केस और मजबूत नहीं हो जाता.’

उन्होंने कहा, ‘LoP के तौर पर, आपसे कुछ गंभीरता और जिम्मेदारी दिखाने की उम्मीद की जाती है. आप कहते हैं, ‘डरो मत.’
फिर फैक्ट्स लाएं, स्क्रूटनी का सामना करें और जवाब सुनने के लिए रुकें. हाउस में, बहस के उन स्टैंडर्ड को बनाए रखें जिनकी आप दूसरों से उम्मीद करते हैं.’